हाँ सखी के हाथ में छाले पड़े हैं

हर किसी के हाथ में छाले पड़े हैं

फिर उदासी ने है थामा हाथ मेरा
फिर ख़ुशी के हाथ में छाले पड़े हैं

हाथ होना चाहिए हाथों में जिस के
हाँ उसी के हाथ में छाले पड़े हैं

जिस किसी ने मुझ पे उँगली थी उठाई
उन सभी के हाथ में छाले पड़े हैं

मौत मेरा हाथ पकड़े चल रही हैं
ज़िन्दगी के हाथ में छाले पड़े हैं

वक़्त मेरा इस लिए ठहरा हुआ हैं
फिर घड़ी के हाथ में छाले पड़े हैं

ज़ख़्म देने वाले अपने ही थे सारे
अजनबी के हाथ में छाले पड़े हैं

जिस के पीछे हम कभी बचपन में दौड़े
उस परी के हाथ में छाले पड़े हैं

दिल लगे कमलेश अब कैसे किसी से
आशिक़ी के हाथ में छाले पड़े हैं

— Kamlesh Goyal

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