vo chaand sa ik chehra sone pe suhaaga hai | वो चाँद सा इक चेहरा सोने पे सुहागा है

  - Kashif Adeeb Makanpuri

वो चाँद सा इक चेहरा सोने पे सुहागा है
और उसपे है तिल काला सोने पे सुहागा है

कुछ फ़र्क़ पड़ा उस पर बदली न रविश उसकी
दीवाना है और सहरा सोने पे सुहागा है

बेहाल परीशाँ हूँ दुनिया का हूँ ठुकराया
और मुझ पे तिरा हँसना सोने पे सुहागा है

भाई की कलाई पर बाँधा है जो बहनों ने
हाँ प्यार का ये धागा सोने पे सुहागा है

वो जब भी कभी बोलें मोती से बरसते हैं
और जादू भरा लहजा सोने पे सुहागा है

है नाम तिरा लब पर आँखों में तिरी सूरत
और सर पे तिरा साया सोने पे सुहागा है

शीरीनी है लज़्ज़त है हर लफ़्ज़ अनोखा है
ये उर्दू ज़बां भी क्या सोने पे सुहागा है

ता'रीफ़ मैं कर पाऊं किस तरह भला काशिफ़
वो शख़्स ही सरमाया सोने पे सुहागा है

  - Kashif Adeeb Makanpuri

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