chalte ho meri raah kya | चलते हो मेरी राह क्या

  - Kinshu Sinha

चलते हो मेरी राह क्या
होना ही है तबाह क्या

हमको जो देखे तक नहीं
करनी उधर निगाह क्या

तय कर लिया तो कर लिया
लेनी कोई सलाह क्या

पीते तो सब हैं दर्द में
हमने किया गुनाह क्या

हम ‛आह’ सुनने वालों को
मिल जाती है पनाह क्या

समझे नहीं जो शे'र तो
करते हो वाह वाह क्या

दुनिया से लड़ने कहती हो
कर लोगी तुम निक़ाह क्या

अब जो किया, सही किया
इल्ज़ाम क्या, गवाह क्या

महताब है चमक रहा
अब होगी और सबाह क्या

ये देखो ज़िन्दगी मेरी
कुछ इस सेे है सियाह क्या

होना है बस ज़लील ‛किंशु’
होगी कुछ और चाह क्या

  - Kinshu Sinha

Mashwara Shayari

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