चलते हो मेरी राह क्या
होना ही है तबाह क्या
हमको जो देखे तक नहीं
करनी उधर निगाह क्या
तय कर लिया तो कर लिया
लेनी कोई सलाह क्या
पीते तो सब हैं दर्द में
हमने किया गुनाह क्या
हम ‛आह’ सुनने वालों को
मिल जाती है पनाह क्या
समझे नहीं जो शे'र तो
करते हो वाह वाह क्या
दुनिया से लड़ने कहती हो
कर लोगी तुम निक़ाह क्या
अब जो किया, सही किया
इल्ज़ाम क्या, गवाह क्या
महताब है चमक रहा
अब होगी और सबाह क्या
ये देखो ज़िन्दगी मेरी
कुछ इस सेे है सियाह क्या
होना है बस ज़लील ‛किंशु’
होगी कुछ और चाह क्या
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