मेरा ग़म इंक़लाब लाएगा
मेरे हक़ में ख़िताब लाएगा
होगा जो बे-वफ़ाई का मारा
शा'इरी की किताब लाएगा
मैं हूँ इस इंतिज़ार में बैठा
कोई इक दिन गुलाब लाएगा
छोड़ दूँगा सवाल करना जब
तब वो अपना जवाब लाएगा
एक पल के सफ़र की ख़ातिर सोच
क्यूँ ही कोई नक़ाब लाएगा
दर्द जिस को हुआ नहीं अब तक
दर्द वो बे-हिसाब लाएगा
चाँदनी रात में मेरा महबूब
एक बोतल शराब लाएगा
— Kinshu Sinha















