बहुत चुप चाप औ' सहमा हुआ हूँ
किसी की याद में बैठा हुआ हूँ
बड़ी ग़ैरत से औरत देखती है
कमी है जो मैं इक लड़का हुआ हूँ
ग़ज़ल दुख दर्द सुन लेती है मेरा
यही इक बात मैं समझा हुआ हूँ
— Kush Pandey ' Saarang '
किसी की याद में बैठा हुआ हूँ
बड़ी ग़ैरत से औरत देखती है
कमी है जो मैं इक लड़का हुआ हूँ
ग़ज़ल दुख दर्द सुन लेती है मेरा
यही इक बात मैं समझा हुआ हूँ
Other ghazal from the same pen
Shers of gham.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling