kisi ko laakh alam ho zaraa malaal nahin | किसी को लाख अलम हो ज़रा मलाल नहीं

  - Lala Madhav Ram Jauhar

किसी को लाख अलम हो ज़रा मलाल नहीं
कोई मरे कि जिए कुछ उन्हें ख़याल नहीं

ये जानता हूँ मगर क्या करूँँ तबीअ'त को
कि मय हराम है ऐ वाइज़ो हलाल नहीं

अबस ग़ुरूर है मँगवा के आइना देखो
वो रंग-ओ-रूप नहीं अब वो सिन ओ साल नहीं

हुज़ूर आप जो होते तो कोई क्यूँँ बनता
ये ख़ूबी आप की है ग़ैर की मजाल नहीं

इधर तो देखो हमें दो ही दिन में भूल गए
ये बे-मुरव्वती अल्लाह कुछ ख़याल नहीं

बहार-ए-हुस्न ये दो दिन की चाँदनी है हुज़ूर
जो बात अब की बरस है वो पार-साल नहीं

हज़र न कीजिए मिलने से ख़ाकसारों के
दुआ तो है जो फ़क़ीरों के पास माल नहीं

किसी ने जा के बुराई कही जो 'जौहर' की
कहा ये झूट है उस की तो ये मजाल नहीं

  - Lala Madhav Ram Jauhar

Bimari Shayari

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