kis ne kaha aap se meri museebat hai kya | किस ने कहा आप से मेरी मुसीबत है क्या

  - Mahboob Khizan

किस ने कहा आप से मेरी मुसीबत है क्या
अब ये नदामत है क्यूँँ उस की ज़रूरत है क्या

अब ये तवज्जोह है क्यूँँ मेरे शब-ओ-रोज़ पर
अपने शब-ओ-रोज़ से आप को फ़ुर्सत है क्या

कौन दिखाए मुझे शाम से कितनी हसीं
कौन बताए मुझे वक़्त की क़ीमत है क्या

इतने समाँ इतने शहर एक लगन एक लहर
सात बरस चुप रहे और शिकायत है क्या

इस भरे बाज़ार में हम तो अकेले 'ख़िज़ाँ'
क्यूँँ हैं मिरे साथ लोग ग़म कोई दौलत है क्या

  - Mahboob Khizan

Alone Shayari

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