मिरा शौक़ अपनी जगह है मिरा काम अपनी जगह है
मिरा दिन तो निकले सर-ए-बज़्म पर शाम अपनी जगह है
मैं क्या ही नुमाइश करूँ अपने ग़म अपनी आदत की सब में
ये लहजा भले तल्ख़ है पर मिरा नाम अपनी जगह है
गिला ये नहीं है कि दुनिया ने ठुकराया है मुझ को हर वक़्त
मिरा सब्र अपनी जगह मेरा कोहराम अपनी जगह है
तअल्लुक़ बिखरने लगे तो छुपाने की कोशिश न करना
इज़ाफ़ा तो अपनी जगह है ये अंजाम अपनी जगह है
— Harsh Kumar Bhatnagar















