तेरी जो तस्वीरें थी वो उतार दी है मैं ने दीवार से

सच तो ये है मैं बैर नहीं चाहता अपने परिवार से

अभी भी वो आहट सुन कर दौड़ी चली आती है
नम आँखों से रास्ता देखती है छुप के किवाड़ से

उस ने कहा था कि उसे गजरे बहुत पसंद है
उस की याद में मैं गजरे ले आता हूँ बाजार से

किसी से दिल मिले तो दिल से मोहब्बत करना
सपनों के राजकुमार नहीं मिलते सोलह सोमवार से

— MANOBAL GIRI

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