dekhe usii ke khwaab the kya kaam ke | देखे उसी के ख़्वाब थे क्या काम के

  - Manohar Shimpi

देखे उसी के ख़्वाब थे क्या काम के
बाक़ी अभी चर्चे रहे बस नाम के

इक बात ने उलझा दिया है दोस्तों
वर्ना कभी हम भी बहुत थे काम के

हम बंदगी करते रहे गुमनाम से
पढ़ते रहे दोहे ख़ुदा के नाम के

दिन रात ही तो एक है हमने किया
क्या मोल वो देंगे किए उस काम के

राजा फलों का है सदी से इक वही
रुत कोई भी हो दाम तो है आम के

उम्मीद से पढ़के बहुत सीखा यहाँ
अब स्कूल है थोड़े 'मनोहर' नाम के

  - Manohar Shimpi

Shama Shayari

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