"संग तराश"

संग तराश अब तक कई देखे
ना तुझ सा फनकार देखा
कोई जो सनम इस तरह तराशे
जैसे जीती जागती लगे मूरत भी

ख़ुद-साख़्ता तसव्वर को भी
जो कर दे अपने फन से ज़िन्दा
कौनसे नगर से है अजब ये बाशिंदा
देखके सभी कहें ख़ुदा का है ये बंदा

देखते हाल ए दिल बयाँ यूँ होता
जैसे मूरत भी लगे आज़ुर्दा-जमाल
ख़ुदा के मानिंद है तेरा ये कमाल
जैसे हो संग तराशी की इक मिसाल

— Manohar Shimpi

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Yaad Shayari

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