क़नारएशाम है आह-ओ-फ़ुग़ाँ है
यही ले दे के अपना कारवाँ है
हमारे सोचो दिन कैसे कटेगें
तुम्हारे पास तो कारएजहाँ है
अभी माज़ी में अपने मुब्तला हूँ
कोई पूछे तो कहना बेज़बाँ है
मेरे सज्दों का शाहिद है जो मेरी
जबीं पर चोट के जैसा निशाँ है
जता देती है हालएदिल उदासी
चलो अच्छा है कोई हमज़बाँ है
हक़ीक़त में हमारी शेरगोई
हमारा तर्जुमानएदास्ताँ है
तुम इस
में खोजने आए हो पानी
मुहब्बत आप इक प्यासा कुआँ है
सरएमिज्ग़ाँ उठाऊँ नाज़ उसके
वो बस इज़हार पे कह दे कि हाँ है
इजाज़त ले के ही छूना पड़ेगा
वो मेरा यार ग़ुस्से की दुकाँ है
सुना है मानसून अच्छा है अब के
मेरा भी गाँव में कच्चा मकाँ है
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