bahut shiddat se jo qaaim hua tha | बहुत शिद्दत से जो क़ाएम हुआ था

  - Nadeem Bhabha

बहुत शिद्दत से जो क़ाएम हुआ था
वो रिश्ता हम में शायद झूट का था

मोहब्बत ने अकेला कर दिया है
मैं अपनी ज़ात में इक क़ाफ़िला था

मिरी आँखों में बारिश की घुटन थी
तुम्हारे पाँव बादल चूमता था

तुम्हारी ही गली का वाक़िआ' है
मैं पहली बार जब तन्हा हुआ था

खुजूरों के दरख़्तों से भी ऊँचा
मिरे दिल में तुम्हारा मर्तबा था

मोहब्बत इस लिए भी की गई थी
हमारा शे'र कहना मसअला था

मुझे इक फूल ने समझाई दुनिया
जो तेरे सब्ज़ बाग़ों में खिला था

ज़ुहूर-ए-आदम-ओ-हव्वा से पहले
हमारे वास्ते सब कुछ नया था

ज़मीं पर जब ज़मीनी मसअले थे
तो बारिश भी मुकम्मल वाक़िआ' था

क़दम उठने में कितनी बरकतें थीं
और उन हाथों में कैसा ज़ाइक़ा था

फिर इस के बा'द रस्ते मर गए थे
मैं बस इक साँस लेने को रुका था

  - Nadeem Bhabha

Charagh Shayari

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