jaisa hooñ jis haal men hooñ achha hooñ main | जैसा हूँ जिस हाल में हूँ अच्छा हूँ मैं

  - Nadeem Bhabha

जैसा हूँ जिस हाल में हूँ अच्छा हूँ मैं
तुम ने ज़िंदा समझा तो ज़िंदा हूँ मैं

इक आवाज़ के आते ही मर जाऊँगा
इक आवाज़ के सुनने को ज़िंदा हूँ मैं

खुले हुए दरवाज़े दस्तक भूल चुके
इन्दर आ जाओ पहचान चुका हूँ मैं

और कोई पहचान मिरी बनती ही नहीं
जानते हैं सब लोग कि बस तेरा हूँ मैं

जाने किस को राज़ी करना है मुझ को
जाने किस की ख़ातिर नाच रहा हूँ मैं

अब तो ये भी याद नहीं कि मोहब्बत में
कब से तेरे पास हूँ और कितना हूँ मैं

  - Nadeem Bhabha

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