bas yahii kuchh hai martaba mire paas | बस यही कुछ है मर्तबा मिरे पास

  - Nadeem Bhabha

बस यही कुछ है मर्तबा मिरे पास
एक तू है और इक दुआ मिरे पास

तुझे कुछ वक़्त चाहिए मिरी जान
वक़्त ही तो नहीं बचा मिरे पास

रौशनी हिफ़्ज़ हो चुकी है मुझे
रख गया था कोई दिया मिरे पास

ये तिरी गुफ़्तुगू का लम्हा है
इस घड़ी है मिरा ख़ुदा मिरे पास

टहनियाँ झुक रही थीं तेरे लिए
और फल टूट के गिरा मिरे पास

एक रूमाल आँसूओं से भरा
और इक ख़त जला हुआ मिरे पास

तेरा नेमुल-बदल नहीं कोई
तू फ़क़त एक ही तो था मिरे पास

अब मैं झगड़ा करूँँ तो किस से करूँँ
अब तो तू भी नहीं रहा मिरे पास

  - Nadeem Bhabha

Ibaadat Shayari

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