lagta nahin kahii bhi mira dil tire baghair | लगता नहीं कहीं भी मिरा दिल तिरे बग़ैर

  - Nadir Shahjahanpuri

लगता नहीं कहीं भी मिरा दिल तिरे बग़ैर
दोनों जहाँ नहीं मिरे क़ाबिल तिरे बग़ैर

कुछ लुत्फ़-ए-ज़िंदगी नहीं हासिल तिरे बग़ैर
पल भर गुज़ारना भी है मुश्किल तिरे बग़ैर

तू ही नहीं तो कौन करे मेरी रहबरी
कटती नहीं हयात की मंज़िल तिरे बग़ैर

दिल पर मिरे ही शाक़ नहीं है तिरा फ़िराक़
ख़ामोश हैं चमन में अनादिल तिरे बग़ैर

फूलों के इबतिसाम पे आती है अब हँसी
ऐसा बुझा हुआ है मिरा दिल तिरे बग़ैर

होश-ओ-हवा से-ओ-अक़ल-ओ-ख़िरद दे गए जवाब
यानी नहीं हूँ मैं किसी क़ाबिल तिरे बग़ैर

हर दम ये सोच है मिरे जीने से फ़ाएदा
जब मक़्सद-ए-हयात है बातिल तिरे बग़ैर

तकमील-ए-आरज़ू से है तकमील-ए-ज़िंदगी
क्यूँँकर हो ज़िंदगी मिरी कामिल तिरे बग़ैर

कश्ती निकल तो आई है गिर्दाब से मगर
दिल डूबने लगा लब-ए-साहिल तिरे बग़ैर

हर दम तड़प के लोटता फिरता हूँ ख़ाक पर
गोया बना हूँ ताइर-ए-बिस्मिल तिरे बग़ैर

आँखें ही पहले रोती थीं अब तो ये क़हर है
रोने लगा है ख़ून मिरा दिल तिरे बग़ैर

'नादिर' को जान देने से क्यूँँ रोकता है तू
जीने से भी है क्या उसे हासिल तिरे बग़ैर

  - Nadir Shahjahanpuri

Dil Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Nadir Shahjahanpuri

As you were reading Shayari by Nadir Shahjahanpuri

Similar Writers

our suggestion based on Nadir Shahjahanpuri

Similar Moods

As you were reading Dil Shayari Shayari