main ne jab likhna seekha tha | मैं ने जब लिखना सीखा था

  - Nasir Kazmi

मैं ने जब लिखना सीखा था
पहले तेरा नाम लिखा था

मैं वो सब्र-ए-समीम हूँ जिस ने
बार-ए-अमानत सर पे लिया था

मैं वो इस्म-ए-अज़ीम हूँ जिस को
जिन्न-ओ-मलक ने सज्दा किया था

तू ने क्यूँँ मिरा हाथ न पकड़ा
मैं जब रस्ते से भटका था

जो पाया है वो तेरा है
जो खोया वो भी तेरा था

तुझ बिन सारी 'उम्र गुज़ारी
लोग कहेंगे तू मेरा था

पहली बारिश भेजने वाले
मैं तिरे दर्शन का प्यासा था

  - Nasir Kazmi

Budhapa Shayari

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