kabhi hañskar kabhi rokar tumhaari baat karte hain | कभी हँसकर कभी रोकर तुम्हारी बात करते हैं

  - Naved sahil

कभी हँसकर कभी रोकर तुम्हारी बात करते हैं
कि हम कोई भी सूरत पर तुम्हारी बात करते हैं

हमारी ज़िंदगी में और क्या है, बस उदासी है
इसी ख़ातिर तो हम दिनभर तुम्हारी बात करते हैं

सुख़न पर रंग चढ़ता ही नहीं है एक अर्से से
तो होगा अब यही बेहतर तुम्हारी बात करते हैं

हमारी बात होगी तो उदासी फैल जाएगी
सबा में रंगतें बो कर तुम्हारी बात करते हैं

जहाँ हम क़ैद रहते हैं किराए के वो कमरे में
अकेलेपन से घबराकर तुम्हारी बात करते हैं

  - Naved sahil

Gunaah Shayari

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