हिज्र की ये रात है मगर मैं रो नहीं रहा

हर तरफ़ से मात है मगर मैं रो नहीं रहा

क्या सितम की अब मलाल भी नहीं जुदाई का
मौत की ज़कात है मगर मैं रो नहीं रहा

यूँ समझ कि जिस्म है बगैर रूह के अभी
क़ैद में हयात है मगर मैं रो नहीं रहा

हैफ़ बेबसी तो देखिए कि कहना पड़ रहा
ख़ुद-कुशी की बात है मगर मैं रो नहीं रहा

नीर वो नहीं मिरी ये जान कर भी मौन हूँ
पहली वारदात है मगर मैं रो नहीं रहा

— Neeraj Neer

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