तिरीतलाशमेंजोख़ुदकोभूलआएथे
पतावोअपनाकभीढूँडनेनपाएथे
किसेख़बरथीकिफूलोंमेंभीहुनरहैवही
किसएहतियातसेकाँटोंसेबचकेआएथे
वोबे-हिसीकाथाआलमज़राख़बरनहुई
किरौशनीथीसर-ए-रहगुज़रकिसाएथे
किनारेदूरबहुतदूरथेतूमजबूरन
समुंदरोंमेंहीलोगोंनेघरबसाएथे
हरएकबूँदकईबिजलियोंकीहामिलथी
शदीदबरखानेबस्तीकेघरजलाएथे
येकैसेबोझचलेआएफिरसेपलकोंपर
किइकज़मानेपरहमआजमुस्कुराएथे