इश्क़ में मेरे दिल को खिलौना किया
ख़ूब खेला फिर उस से किनारा किया
अश्क आँखों से मेरी निकलते रहे
एक दरिया को यूँ मैं ने सहरा किया
मैं ने दफ़ना के टूटे हुए फूलों को
तितलियों का जो ग़म था वो हल्का किया
वक़्त आना था मेरा भी इक दिन मगर
वक़्त ने भी मेरे साथ धोका किया
रास्ता रोक कर जो खड़ी थी 'रचित'
ऐसी दीवार को हम ने मलबा किया
— Rachit Sonkar















