jeet jaun main ab ki chal do got jaaneman | जीत जाऊंँ मैं अब की चल दो गोट जानेमन

  - Rachit Sonkar

जीत जाऊंँ मैं अब की चल दो गोट जानेमन
दे दो मेरे होंठों पे अपना वोट जानेमन

तुम मेरी मोहब्बत पे क्यों यक़ीं नहीं करते
क्या है मेरी चाहत में कोई खोट जानेमन

तब मज़ा मोहब्बत का मुझको खुल के आएगा
जब उभर के आएगी दिल की चोट जानेमन

मेरे दिल को जब जब भी, कोई चीज़ भाती है
देखता नहीं हूँ मैं फिर तो नोट जानेमन

क्या मुझे समझता है ,हाथ का खिलौना तू
क्या मैं तेरी ख़ातिर हूँ इक रिमोट जानेमन

  - Rachit Sonkar

Masti Shayari

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