इस घर में मातम रोज़ का ही रहता है
बस इस लिए ये दिल दुखा ही रहता है
तुम इश्क़ में जितना भी उस को चाह लो
जो बे-वफ़ा है बे-वफ़ा ही रहता है
है बे-हया इतना कि क्या तुम से कहें
जो देख ले तो देखता ही रहता है
मैं चाहे जितना भी करूँ उस के लिए
मुझ से उसे बस मसअला ही रहता है
मैं काट तो देता हूँ तेरा फ़ोन पर
ये हाथ मेरा काँपता ही रहता है
ये जाने कैसा जादू है तेरा 'रजत'
जो तेरा हो जाए तेरा ही रहता है
— Rajat Bhardwaj















