rukh se jo mere yaar ne parda hata diya | रुख़ से जो मेरे यार ने पर्दा हटा दिया   

  - SALIM RAZA REWA

रुख़ से जो मेरे यार ने पर्दा हटा दिया   
महफ़िल में हुस्न वालों को पागल बना दिया

उसकी हर‌ एक अदा पे तो क़ुर्बान जाइए        
मौसम को जिसने छू के नशीला बना दिया

आई बहार झूम के ख़ुशबू बिखेरती 
ज़ुल्फें उड़ा के कौन सा जादू चला दिया 

महफ़िल में होश वाले भी मदहोश हो गए
ये क्या किया कि सबको दिवाना बना दिया

देखा जो उसने प्यार से बस इक नज़र मुझे
दिल में हमारे प्यार का गुलशन खिला दिया

  - SALIM RAZA REWA

Dosti Shayari

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