ईमान की शम्अ'

ऐ मेरे दोस्त मोहब्बत को बचाए रखना
दिल में ईमान कि शम्ओं को जलाए रखना

इस नए साल में ख़ुशियों का चमन खिल जाए
सब को मनचाही मुरादों का सिला मिल जाए
इस नए साल में ख़ुशियों की हो बारिश घर घर
इस नए साल को ख़ुश-रंग बनाए रखना

जान पुरखों ने लुटाई है वतन की ख़ातिर
गोलियाँ सीने में खाई है वतन की ख़ातिर
सारे धर्मों से ही ताक़त है वतन की मेरे
सारे धर्मों की मोहब्बत को बनाए रखना

ज़ात के नाम पे दंगों को कराने वालो
बाज़ आ जाओ मोहब्बत को मिटाने वालो
धर्म के नाम पे यूँ आग लगाने वालो
ख़ुद के दामन को भी जलने से बचाए रखना

क्यूँ मिटाने में लगे हो ये चमन की ख़ुशबू
ख़ून से सींचा तो पाई है वतन की ख़ुशबू
हर तरफ़ जलने लगा है ये वतन का आँचल
लाज इस माँ की मेरे यार बचाए रखना

सारी दुनिया में मोहब्बत की ज़बाँ हो जाए
सारी दुनिया में ख़ुशी अम्न-ओ-अमाँ हो जाए
भूल कर भी न कोई भूल हो हरगिज़ मुझ से
मुझ पे भी नज़्र-ए-करम अपनी बनाए रखना

दिल से नफ़रत की मिनारों को गिराना होगा
दोस्त बनकर के गले सब को लगाना होगा
जिन की ख़ुशबू से महक जाए वतन का आँगन
ऐसे फूलों को भी गुलशन में लगाए रखना

— SALIM RAZA REWA

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