आज नहीं तो कल जाना है
एक न इक दिन जल जाना है
वो ही बच कर कड़ पाया है
जिस ने ये दलदल जाना है
उस ने दुनिया जान ली जिस को
दुनिया ने पागल जाना है
रोना धोना कुछ दिन का है
उस के बा'द बहल जाना है
ये जो तुम ने हँसकर देखा
ये भी उस को खल जाना है
उन को मेहनत मत समझाओ
जिन हाथों ने हल जाना है
ख़ुद भी ख़ुद को ढूँढ़ न पाऊँ
इतनी दूर निकल जाना है
तुम बस उस की आँखें देखो
और फिर जादू चल जाना है
— Sanjay shajar















