main haath zara sa pakadoonga ke tum dar jaaoge | मैं हाथ ज़रा सा पकडूँगा के तुम डर जाओगे

  - Sarvjeet Singh

मैं हाथ ज़रा सा पकडूँगा के तुम डर जाओगे
कुछ पल को मिलने आओगे फिर तुम घर जाओगे

तुम तो जैसे-तैसे भी दिल बहला लोगे अपना
पर मेरे दिल को तो पूरा ख़ाली कर जाओगे

इतना भी क्या डरते हो इस दुनिया से जानाँ तुम
ये लोग न पीछा छोड़ेंगे चाहे मर जाओगे

गुल भी होंगें काँटे भी सहरा और समुंदर भी
क्या मेरे साथ उमर भर एक सफ़र पर जाओगे?

'सर्व' नहीं दिखता है वो दूर तलक अब देखे,जो
ज़िद करता था मैं भी आऊँगा तुम गर जाओगे

  - Sarvjeet Singh

Kanta Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Sarvjeet Singh

As you were reading Shayari by Sarvjeet Singh

Similar Writers

our suggestion based on Sarvjeet Singh

Similar Moods

As you were reading Kanta Shayari Shayari