मेरी आँखों में क्या है आँख भर कर देख लेना तुम
मुहब्ब्त का ये दरिया है उतर कर देख लेना तुम
मैं बाहरस जो दिखता हूँ वही अंदर से हूँ यारों
है फिर भी शक तो कोई और बेहतर देख लेना तुम
मिले माँ बाप तुम को ये किसी जन्नत से कम है क्या
अनाथों की भरी आँखों का सागर देख लेना तुम
मुहब्ब्त का किराया भर नहीं पाए तो भटकोगे
रखे मालिक भरोसा जो वहाँ घर देख लेना तुम
चमक सोने सी आएगी हुनर जीने का आएगा
मुहब्ब्त नाम की भट्टी में तपकर देख लेना तुम
कभी भी ज़िन्दगी के एक पहलू से न घबराना
सरल हो प्रश्न पर्चे को पलटकर देख लेना तुम
बिछा रक्खा है मेरा दिल यहाँ कालीन के बदले
कभी मेरी गली से बस गुज़र कर देख लेना तुम
अगर हिम्मत न हो जीने की मरना रास आए तो
शिवा की ज़िंदगी का एक मंज़र देख लेना तुम















