ruksat vo kar rahi thii mujhe pur-wafa ke saath | रुख़्सत वो कर रही थी मुझे पुर-वफ़ा के साथ

  - Shivang Tiwari

रुख़्सत वो कर रही थी मुझे पुर-वफ़ा के साथ
कुछ शे'र मेरे पढ़ रही थी फ़ातिहा के साथ

कहना न तुम कि माँ को कभी मानते नहीं
अच्छा नहीं है कुफ़्र किसी देवता के साथ

बस दो तरह से ज़िन्दगी ये ख़र्च हो गई
या तो वबा के साथ नहीं तो दवा के साथ

मुंसिफ को जब से 'इश्क़ गुनहगार से हुआ
वो गर सज़ा भी दे रहा तो इल्तिजा के साथ

फिर से दिखाओ 'इश्क़ के आयाम कुछ नए
फिर से रचाओ रास किशन राधिका के साथ

  - Shivang Tiwari

Qaid Shayari

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