अपना हसीन चेहरा दिखाओ ना तुम कभी

ओ दिल फ़रेब दिल को लगाओ ना तुम कभी

पर्दा नशीली आँखों को जो देखते हैं हम
वो रुख़ से अपने पर्दा हटाओ ना तुम कभी

मेरी निगाह-ए-इश्क़ की हसरत है बस यही
अपनी निगाह-ए-नाज़ लूटाओ ना तुम कभी

तुम गुलसिताँ में एक कली की बहार हो
मेरे चमन में फूल को खिलाओ ना तुम कभी

गुल-हाए-रंग-रंग मिले तुम को देख कर
दिल हाए संग संग मिलाओ ना तुम कभी

एजाज़-ए-शायरी कहो अपनी ज़बान से
ख़स्ता सोहैल शे'र सुनाओ ना तुम कभी

— Shaikh Sohail

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