ये ग़म तो दिल की आदत है, करें क्या?
वुफ़ूर-ए-ग़म में लत-पत है, करें क्या?
रूदाद-ए-ग़म किसे मिल कर सुनाए?
शरीक-ए-ग़म से दहशत है, करें क्या?
शरीक-ए-रंज-ओ-राहत जो मिला है
वो अंदोह-ए-समा'अत है, करें क्या?
सोहेल-ए-बे-सुख़न-ना-चीज़-ओ-ख़स्ता
को ग़म रखने की आदत है, करें क्या?
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shaikh Sohail
our suggestion based on Shaikh Sohail
As you were reading Udasi Shayari Shayari