un ke rukhsaar pe mar mar ke vo aanaa dil ka | उन के रुख़सार पे मर मर के वो आना दिल का

  - Shaikh Sohail

उन के रुख़सार पे मर मर के वो आना दिल का
कितना मुश्किल है हसीनों से बचाना दिल का

हम सुनाए जो कभी दिल से फ़साना दिल का
सब सुना पर वो कभी दर्द ना जाना दिल का

हम को आता है फ़क़त दिल से लगाना दिल का
उन को आया है तो बस दिल ही दिखाना दिल का

उन का अंदाज़-ए-अदावत कहो सुब्हान-अल्लाह
वो तो सीधा ही लगाते हैं निशाना दिल का

ठीक से बात भी करने नहीं आती थी उन्हें
अब तो आ जाता है औरों से लगाना दिल का

मात खाते हैं यहाँ दिल को लगाने वाले
भारी पड़ जाता है अक्सर यूँँ लगाना दिल का

बे-रूख़ी ऐसी के अब हाए परेशान है दिल,
बे-दिली ऐसी के हम ढूँढे ठिकाना दिल का

जब थे वो साथ तभी दिल पे यूँँ जलवा था के अब
उन के ना होने से लगता है ना होना दिल का

जब कभी रास्ते में दफ़'अतन मिल जाए कहीं
उन को बस देखते फूले ना समाना दिल का

उन से मिलने को 'सोहेल' इतना मचलते भी हो
उन से ना मिलने पे करते हो बहाना दिल का

  - Shaikh Sohail

Baaten Shayari

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