she'r kahtaa raha she'r padhta raha | शे'र कहता रहा शे'र पढ़ता रहा

  - Sohil Barelvi

शे'र कहता रहा शे'र पढ़ता रहा
मैं इसी कैफ़ियत में हमेशा रहा

वो जहाँ पर मुझे ख़ुश नज़र आ रहा
मैं न पहुँचा वहाँ ये भी अच्छा रहा

चारागर ने मज़े में की चारागरी
ज़ख़्म तो भर गया दर्द ठहरा रहा

मैं ने बोला नहीं तू ने देखा नहीं
नाम तेरा हथेली पे लिक्खा रहा

वो गुनहगार था जो न कुछ कह सका
बोलता जो रहा वो ही सच्चा रहा

डूब कर मर गए सब मिरे रू-ब-रू
मैं अकेला ही साहिल पे बैठा रहा

कोई मंज़िल मुयस्सर नहीं हो सकी
तेरा मेरा सफ़र एक जैसा रहा

  - Sohil Barelvi

Sad Shayari

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