जब गिरे हम आसमाँ से झूट के
खुल न पाए बंद पैराशूट के
अपना ही मेला सजाने लग गए
तुम हमारी उँगलियों से छूट के
एक रस्सी है गले में मेरे और
हाथ में रेशे भरे हैं जूट के
मंज़िलों का दुख नया दुख था इन्हें
रो पड़े छाले हमारे फूट के
— Swapnil Tiwari
खुल न पाए बंद पैराशूट के
अपना ही मेला सजाने लग गए
तुम हमारी उँगलियों से छूट के
एक रस्सी है गले में मेरे और
हाथ में रेशे भरे हैं जूट के
मंज़िलों का दुख नया दुख था इन्हें
रो पड़े छाले हमारे फूट के
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