तिरीगलीमेंगएकितनेमाहओसालहुए
गुज़रगएकईमौसमहमेंबहालहुए
ज़बाँमेंथीअभीलुक्नतकिहर्फ़-ए-इश्क़कहा
लड़कपनाथाकिज़ंजीर-ए-ख़द्द-ओ-ख़ालहुए
मैंमुस्कुरातारहाऔरमुस्कुरातारहा
सवालमुझपेकईमेरेहस्ब-ए-हालहुए
नहींकिकोहकनओक़ैसकाज़मानानहीं
मगरयेबातकियेलोगख़ालख़ालहुए
ठहरगयासवानेज़ेपेआनकरसूरज
गुज़रगईंकईसदियाँहमेंज़वालहुए
फिरउसकीयादनेदस्तकदिल-ए-हज़ींपरदी
फिरआँसुओंमेंनिहाँउसकेख़द-ओ-ख़ालहुए
मिसाल-ए-नक़्श-ए-कफ़-ए-पानउठसके'तहसीं'
ब-रंग-ए-सब्ज़ाहमइसदर्जापाएमालहुए