रब्त क्या आते निभाने आप को

राज़ होते हैं छुपाने आप को

दरमियाँ में ज़ात का है मसअला
प्यार में हैं गुल खिलाने आप को

वस्ल की शब भी बहाना नींद का
हैं बहुत आते बहाने आप को

हर किसी से आप मिलते हैं गले
कितनो के हैं घर बसाने आप को

कूचा-ए-माज़ी में जा कर शा'इरी
खोटे सिक्के हैं चलाने आप को

— Abhishek Baba

More by Abhishek Baba

Other ghazal from the same pen

See all from Abhishek Baba →

Raaz Shayari

Shers of raaz.

All Raaz Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling