RAAHI
RAAHI
Ghazal

दर्द दिल तू भी न ज़्यादा बे-वफा़ को याद कर

है पुरानी दिल-लगी बस इस ख़ता को याद कर

टूटते ख़्वाबों तलक बस याद तुम को जो किया
ये जहाँ के फै़सले पर हम-नवा को याद कर

कल जिसे ये दिल अदब से जान जानाँ बोलता
उस अदब की इक कहानी बे-अदा को याद कर

जान मेरी जो कभी थी, आज बिस्तर पर कहीं
छोड़ राही तू नहीं अब दिलरुबा को याद कर

— RAAHI

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