चेहरे में छुपे दूसरे चेहरे नहीं खोले
लोगों ने अभी आख़री पत्ते नहीं खोले
ऐसा तो नहीं है कि फ़क़त मैं ही हूँ ग़मगीं
उसने भी अभी रूह के टाँके नहीं खोले
मेरा भी कभी उसके बिना दिन नहीं कटता
उसने भी मेरे बिन कभी रोज़े नहीं खोले
मालूम हमें भी हैं कई राज़ तुम्हारे
पर हमने तुम्हारे कभी किस्से नहीं खोले
बस एक यही ग़म है जो खाता है मुझे अब
तूने तो अभी तक मेरे तोहफ़े नहीं खोले
कमरे में मेरे क़ैद हैं यादें जो तुम्हारी
वो साथ रहें इसलिए ताले नहीं खोले
आज़ाद थे दोनों कोई पाबंदी नहीं थी
पर हमने कभी 'इश्क़ में तस्में नहीं खोले
बस जुर्म यही था के मैं बेज़ार था फिर भी
आँखों के कभी मैंने ये चश्में नहीं खोले
दुश्मन ये समझता है के मैं हार चुका हूँ
मैंने तो अभी कीमती मोहरे नहीं खोले
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