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तोड़ कर दिल दुआएँ देते हैं - Haider Khan

तोड़ कर दिल दुआएँ देते हैं
ज़ख़्म देकर दवाएँ देते हैं

रूठ जातें हैं बे-सबब हमसे
बे-सबब ही सज़ाएँ देते हैं

ख़्वाब आँखों के छीन कर ये लोग
ज़िन्दगी की दुआएँ देते हैं

घर यहाँ जब किसी का जलता है
अपने ही कुछ हवाएँ देते हैं

मुस्कुराते हैं ख़ूब सब लेकिन
रूह के ग़म सदाएँ देते हैं

घर बनाने के वास्ते कुछ लोग
बस्तियाँ सारी ढाएँ देते हैं

- Haider Khan

Zakhm Shayari

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