तोड़ कर दिल दुआएँ देते हैं
ज़ख़्म देकर दवाएँ देते हैं
रूठ जातें हैं बे-सबब हम सेे
बे-सबब ही सज़ाएँ देते हैं
ख़्वाब आँखों के छीन कर ये लोग
ज़िन्दगी की दुआएँ देते हैं
घर यहाँ जब किसी का जलता है
अपने ही कुछ हवाएँ देते हैं
मुस्कुराते हैं ख़ूब सब लेकिन
रूह के ग़म सदाएँ देते हैं
घर बनाने के वास्ते कुछ लोग
बस्तियाँ सारी ढाएँ देते हैं
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