jism meraa par ye saaya kaun hai | जिस्म मेरा, पर ये साया कौन है?

  - Haider Khan

जिस्म मेरा, पर ये साया कौन है?
इस क़दर मुझ में समाया कौन है?

नींद में पलकें चमकती हैं मेरी
ख़्वाब में मेरे ये आया कौन है?

किसकी धुँदली सी हैं यादें ज़ह्न में?
कौन है वो ए ख़ुदाया कौन है?

मुश्किलें घेरें तो ये मालूम हो
कौन अपना है, पराया कौन है?

दौलतों के भूके नंगे दौर में
किसने रिश्तों को निभाया, कौन है?

  - Haider Khan

Khwab Shayari

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