ऐ मिरी जबीं-साई
मेरे ज़र्द सज्दों का
तू ही कुछ भरम रख ले
ख़ुश्क सर्द जंगल में
ना-रसा इरादों से
मैं कहाँ ख़ुदा ढूँडूँ
— Uzma Naqvi
मेरे ज़र्द सज्दों का
तू ही कुछ भरम रख ले
ख़ुश्क सर्द जंगल में
ना-रसा इरादों से
मैं कहाँ ख़ुदा ढूँडूँ
Other nazm from the same pen
Shers of khuda.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling