udaas naina jo barsate hain sahaab ki tarah | उदास नैना जो बरसते हैं सहाब की तरह

  - Vandana Bhardwaj Tiwari Vani

उदास नैना जो बरसते हैं सहाब की तरह
तो ग़म के फूल भी महकते हैं गुलाब की तरह

लरज़ लरज़ के ऐसे याद आते हैं वो गुज़रे दिन
कि नफ़्स नफ़्स झनझनाता है रबाब की तरह

ये दुनिया के नज़ारे यादें ख़्वाब इश्क़ ज़िंदगी
लुभाते हैं यहाँ पे सब के सब सराब की तरह

जहाँ के ज़ुल्म सहते सहते फ़ाख़्ता भी बारहा
अक़ब से पंजे मारती है फिर उक़ाब की तरह

जहान-ए-हुस्न का यही हुआ है हश्र हर दफ़ा
कि चार दिन में ये घटा है माहताब की तरह

ज़बाँ पे जब भी आह बन के आरज़ू मचलती है
तो दर्द सीना में उभरता है हबाब की तरह

पिला दे जाम साक़िया कि रात आने वाली है
हमें फुलाँ की याद आई फिर अज़ाब की तरह

  - Vandana Bhardwaj Tiwari Vani

Duniya Shayari

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