ajal ke saath chale hain yuñ intizaar ke baad | अजल के साथ चले हैं यूँँ इंतिज़ार के बा'द

  - Vicky Malik
अजलकेसाथचलेहैंयूँँइंतिज़ारकेबा'द
वफ़ाकेक़हतपड़ेंगेवफ़ा-शिआ'रकेबा'द
मिलेंकहाँसेवोहमसेसनम-परस्तकियाँ
जोबंदगीकरेंतेरीगुनाहगारकेबा'द
निगाह-ए-नाज़केतीरोंकीदिलमेंलुत्फ़-ओ-ख़लिश
नहींकहींपेवोमेरेसितम-शिआ'रकेबा'द
कियाजोक़त्लउन्होंनेतोपूछोउनसेकोई
क़रारमेंनहींहैंक्यूँवोबे-क़रारकेबा'द
ख़रीदकरग़म-ए-जाँतुझसेमेरेशोख़-ओ-हसीं
मलालकोईकरेगादिल-फ़िगारकेबा'द
ख़ुदाभीमहव-ए-कशाकशहैख़ुल्दकेलिएहूर
बनाएकैसीहसींतुझसेशाहकारकेबा'द
करेंजोइश्क़तोरहतीकहाँयेरंग-ओ-रविश
मिलेंगेतुझसेकभीहमजफ़ा-ए-यारकेबा'द
येदिल-लगीतोकरेहैंवफ़ा-शिआ'रहोंतब
तुम्हारीज़ुल्फ़सँवारेंअगरख़ुमारकेबा'द
येइश्क़ज़रसेहैताकियेखस्ता-हालोंसे
हमारादा'वाकरेंगेवोरोज़गारकेबा'द
बदनकेटुकड़ेखिलाएतमामउम्रउसे
ग़रीबीभूकसेमरजाएगी'वक़ार'केबा'द
  - Vicky Malik
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Gham Shayari

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