hawa ke vaar pe ab vaar karne vaala hai | हवा के वार पे अब वार करने वाला है

  - Vikas Sharma Raaz

हवा के वार पे अब वार करने वाला है
चराग़ बुझने से इंकार करने वाला है

ख़ुदा करे कि तिरा अज़्म बरक़रार रहे
ज़माना राह में दीवार करने वाला है

वही दिखाएगा तुझ को तमाम दाग़ तिरे
जिसे तू आइना-बरदार करने वाला है

ये वार तो कभी ख़ाली नहीं गया मेरा
कोई तो उस को ख़बर-दार करने वाला है

उसी ने रंग भरे हैं तमाम फूलों में
वही शजर को समर-दार करने वाला है

ज़मीन बेच के ख़ुश हो रहे हो तुम जिस को
वो सारे गाँव को बाज़ार करने वाला है

  - Vikas Sharma Raaz

Shama Shayari

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