ग़म-ज़दा दिल पे लतीफ़े भी नहीं खुलते हैं
तेज़ तूफ़ान में छाते भी नहीं खुलते हैं
दिल की जानिब से भी आवाज़ नहीं आती है
हम पे दुनिया के इशारे भी नहीं खुलते हैं
इश्क़ में वापसी आसान नहीं होती है
यहाँ से आगे के रस्ते भी नहीं खुलते हैं
— Vikram Sharma
तेज़ तूफ़ान में छाते भी नहीं खुलते हैं
दिल की जानिब से भी आवाज़ नहीं आती है
हम पे दुनिया के इशारे भी नहीं खुलते हैं
इश्क़ में वापसी आसान नहीं होती है
यहाँ से आगे के रस्ते भी नहीं खुलते हैं
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