log bhi kiya hain kisi ka dil dukha kar KHush hue | लोग भी किया हैं किसी का दिल दुखा कर ख़ुश हुए

  - Virendra Khare Akela

लोग भी किया हैं किसी का दिल दुखा कर ख़ुश हुए
फूल पर बैठी हुई तितली उड़ा कर ख़ुश हुए

प्यास हम अपनी बुझा लें ये इजाज़त है कहाँ
फिर भी ऐ दरिया तिरे नज़दीक आकर ख़ुश हुए

मर्ज़ को पाले हुए रखना समझदारी नहीं
लोग फिर भी ख़ामियाँ अपनी छुपा कर ख़ुश हुए

शक्ल-ओ-सूरत देखने लाएक़ थी तब सय्याद की
क़ैद पंछी जब परों को फड़फड़ा कर ख़ुश हुए

आख़िरश करते भी किया जब क्लास में टीचर न था
सारे बच्चा बच्चियाँ ऊधम मचा कर ख़ुश हुए

बोझ दिल का एक ही झटके में हल्क़ा हो गया
हम तुम्हारी याद में ख़ुद को रुला कर ख़ुश हुए

ऐ 'अकेला' और क्या होना था बस इतना हुआ
सर-फिरे झोंके चराग़ों को बुझा कर ख़ुश हुए

  - Virendra Khare Akela

Rose Shayari

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