हक़ीक़ी चेहरा दिखाएँगे सबको आज तिरा
फ़रेब देना है लोगों को काम-काज तिरा
हमारे सामने आकर अकड़ दिखाता है
हमारे क़दमों की मिट्टी है दोस्त ताज तिरा
अना-परस्त हैं बस अपनी बात मानते हैं
नहीं चलेगा हमारे दिलों पे राज तिरा
तबीब हार गए और मुझ सेे कहने लगे
उसी की दीद है बस आख़िरी इलाज तिरा
शुरू में प्यार की बातें करेगा फिर धोखा
'अमान' जानता है ख़ूब-तर मिज़ाज तिरा
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