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Top 10 of
Ibrahim Ashk
GHAZAL
ग़ज़ल हो गई जब भी सोचा तुम्हें
फ़साने बने जब भी लिक्खा तुम्हें
Ibrahim Ashk
10
GHAZAL
मुझे न देखो मिरे जिस्म का धुआँ देखो
जला है कैसे ये आबाद सा मकाँ देखो
Ibrahim Ashk
9
GHAZAL
करें सलाम उसे तो कोई जवाब न दे
इलाही इतना भी उस शख़्स को हिजाब न दे
Ibrahim Ashk
8
GHAZAL
ज़िंदगी वादी ओ सहरा का सफ़र है क्यूँँ है
इतनी वीरान मिरी राह-गुज़र है क्यूँँ है
Ibrahim Ashk
7
GHAZAL
दुनिया लुटी तो दूर से तकता ही रह गया
आँखों में घर के ख़्वाब का नक़्शा ही रह गया
Ibrahim Ashk
6
GHAZAL
उस की इक दुनिया हूँ मैं और मेरी इक दुनिया है वो
दश्त में तन्हा हूँ मैं और शहर में तन्हा है वो
Ibrahim Ashk
5
GHAZAL
रात भर तन्हा रहा दिन भर अकेला मैं ही था
शहर की आबादियों में अपने जैसा मैं ही था
Ibrahim Ashk
4
GHAZAL
शीशे का आदमी हूँ मिरी ज़िंदगी है क्या
पत्थर हैं सब के हाथ में मुझ को कमी है क्या
Ibrahim Ashk
3
GHAZAL
तिरी ज़मीं से उठेंगे तो आसमाँ होंगे
हम ऐसे लोग ज़माने में फिर कहाँ होंगे
Ibrahim Ashk
2
GHAZAL
देखा तो कोई और था सोचा तो कोई और
जब आ के मिला और था चाहा तो कोई और
Ibrahim Ashk
1
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