ये इशारा तो किसी परवानगी से कम नहीं
रोज़ कुछ कर के गुज़रना तिश्नगी से कम नहीं
एक बच्चा जो अधूरा ख़्वाब लाया गाँव से
शहर दिन भर घूमना आवारगी से कम नहीं
सोच लो तुम अब जुदा मतलब हमेशा के लिए
लौट आना हर दफ़ा शर्मिंदगी से कम नहीं
याद करने के तरीक़े तो बहुत ही हैं मगर
ये इबादत भी किसी साज़िंदगी से कम नहीं
— Ganesh gorakhpuri















