vo barfaani raat | वो बर्फ़ानी रात

  - Yameen
वोबर्फ़ानीरात
बादामअख़रोटऔरसत्तू
सरमाकाशहदऔरसागकीख़ुशबू
औरइकलोककहानीमेंगुम
आगकेगिर्द
मैंऔरतुम
आओचलें
चर्ख़ेकीआवाज़मेंडूबी
उसबस्तीमें
शामजहाँपरऐसेउतरे
जैसेकिसीबीमारबदनमें
जीवन-रस
बर्फ़कीरुतकापहलादिन
कितनासफ़ेदऔरआज़ुर्दाहै
दरियाअपनीमजबूरीकागदलापानी
औरहमारीनादारीके
आँसूअपनीपुश्तपेरक्खेरेंगरहाहै
औरसड़कपर
बरसोंपुरानेलोगनिकलकरचलतेहैं
उनकीआँखें
एकपुरानीयादसेबोझल
औरचेहरोंपर
कोईगहराख़ौफ़जमाहै
धानीघासकेजूतोंमेंये
अपनेजलतेपाँवपहनकर
औरहोंटोंपर
हिज्रकेगीतोंकोसुलगाकर
नएसफ़रपरनिकलेहैं
आओचलें
उनगलियोंकीदुश्वारीमें
जोपंजाबीऔरहाजीपीरकेअंदरखुलतीहैं
जिनकेपार
एकअलावसाजलताहै
जिनमेंचलनेवालाजैसे
गहरेख़्वाबमेंचलताहै
आओचलें
औरचलकरदेखें
जिस्मकेदाग़औररूहकेसोग
आगजलोंनेकबदेखेहैं
बर्फ़मेंजलतेलोग
लोग
जिन्होंने
बर्फ़-रुतोंकाविर्सापालके
किसजोखिमसे
माह-ओ-सालके
अंदररहनासीखलियाथा
उनपरकैसावक़्तपड़ाहै
आओचलेंऔर
एकसवालकीशम्अ'जलाकर
उसबर्फ़ानीरातमेंउतरें
  - Yameen
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Chehra Shayari

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